Hindi CBSE 10th

Hindi CBSE 10th भी अन्य विषयों की तरह बहुत ही important subject है, परन्तु बच्चे हिंदी भाषा के विषय में ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं । इसीलिए session के अंत तक उनके overall percentage पर फर्क पड़ता है । Hindi CBSE 10th को 2 parts में divide किया गया है Hindi Course A और Hindi Course B । इस page में दोनों parts i.e. Hindi Course A and Hindi Course B के syllabus, books, section-wise marking scheme और Course structure की complete information दी गई है । इसको अच्छे से समझने से बच्चों को final exam में अच्छे marks लाने में बहुत help मिलेगी ।

इस page को कुछ इस तरह से design करने की कोशिश की गई है कि readers को complete study material एक ही जगह मिल जाय । हमने ये कोशिश की है कि Hindi CBSE 10th के एक chapter/topic के complete study material एक जगह ही मिल जाएँ । इसलिए हमने हर chapter/topic के study material को table के form में Index किया है, जिस भी chapter/topic को पढना हो उस पर click करने से उसी chapter/topic में पहुच जाएंगे ।

Hindi CBSE 10th के syllabus को PDF में CBSE की official website से भी download किया जा सकता है ।

Hindi Course A

Syllabus

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, नई शिक्षा नीति 2020 तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर दक्षता आधारित शिक्षा, कला समेकित अधिगम, अनुभवात्मक अधिगम को अपनाने की प्रेरणा दी गई है, जो शिक्षार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने खेल-खेल में सीखने पर बल देने, आनंदपूर्ण ज्ञानार्जन और विद्यार्जन के विभिन्न तरीकों को अपनाने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देती है । योग्यता या दक्षता आधारित शिक्षा से तात्पर्य है – सीखने और मूल्यांकन करने का एक ऐसा दृष्टिकोण, जो शिक्षार्थी के सीखने के प्रतिफल और विषय में विशेष दक्षता को प्राप्त करने पर बल देता है । योग्यता वह क्षमता, कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति के वास्तविक जीवन में कार्य करने में सहायता करता है । इससे शिक्षार्थी यह सीख सकते हैं कि ज्ञान और कौशल को किस प्रकार प्राप्त किया जाए तथा उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए । प्रत्येक विषय, प्रत्येक पाठ को जीवनोपयोगी बनाकर प्रयोग में लाना ही दक्षता आधारित शिक्षा है । इसके लिए उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विशेष बल देने की आवश्यकता है ।

कला समेकित अधिगम को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सुनिश्चित करना अत्यधिक आवश्यक है । कला के संसार में कल्पना की एक अलग ही उड़ान होती है कला एक व्यक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है । कला समेकित अधिगम से तात्पर्य है – कला के विविध रूपों संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, रंगशाला, यात्रा, मूर्तिकला, आभूषण बनाना, गीत लिखना, नुक्कड़ नाटक, कोलाज, पोस्टर, कला प्रदर्शनी को शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना । किसी विषय को आरंभ करने के लिए आइस ब्रेकिंग गतिविधि के रूप में तथा समंजस्यपूर्ण समझ पैदा करने के लिए अंतरविषयक या बहुविषयक परियोजनाओं के रूप में कला समेकित अधिगम का प्रयोग किया जाना चाहिए । इससे पाठ अधिक रोचक एवं ग्राहय हो जाएगा ।

अनुभवात्मक अधिगम या अनुभविक ज्ञानार्जन का उद्देश्य शैक्षिक वातावरण को शिक्षार्थी केंद्रित बनाने के साथ-साथ स्वयं मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक रूप से सोचने, निर्णय लेने तथा ज्ञान का निर्माण कर उसमें पारंगत होने से है । यहाँ शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक की रहती है। ज्ञानार्जन-अनुभव सहयोगात्मक अथवा स्वतंत्र होता है और यह छात्रों को एक साथ कार्य करने तथा स्वयं के अनुभव द्वारा सीखने पर बल देता है । यह सिद्धांत और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करता है।

माध्यमिक स्तर तक आते-आते विद्यार्थी किशोर हो चुका होता है और उसमें सुनने, बोलने, पढ़ने, लिखने के साथ-साथ आलोचनात्मक दृष्टि विकसित होने लगती है । भाषा के सौंदर्यात्मक पक्ष, कथात्मकता/गीतात्मकता, अखबारी समझ, शब्द शक्तियों की समझ, राजनैतिक एवं सामाजिक चेतना का विकास, स्वयं की अस्मिता का संदर्भ और आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त भाषा-प्रयोग, शब्दों का सुचिंतित प्रयोग, भाषा की नियमबद्ध प्रकृति आदि से विद्यार्थी परिचित हो जाता है । इतना ही नहीं, वह विविध विधाओं और अभिव्यक्ति की अनेक शैलियों से भी परिचित हो चुका होता है । अब विद्यार्थी की दृष्टि आस-पड़ोस, राज्य-देश की सीमा को लाँघते हुए वैश्विक क्षितिज तक फैल जाती है । इन बच्चों की दुनिया में समाचार, खेल, फिल्म तथा अन्य कलाओं के साथ-साथ पत्र-पत्रिकाएं और अलग-अलग तरह की किताबें भी प्रवेश पा चुकी होती हैं ।

इस स्तर पर मातृभाषा हिंदी का अध्ययन साहित्यिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक भाषा के रूप में कुछ इस तरह से हो कि उच्चतर माध्यमिक स्तर तक पहुंचते-पहुंचते यह विद्यार्थियों की पहचान, आत्मविश्वास और विमर्श की भाषा बन सके । प्रयास यह भी हो कि विद्यार्थी भाषा के लिखित प्रयोग के साथ-साथ सहज और स्वाभाविक मौखिक अभिव्यक्ति में भी सक्षम हो सके ।

इस पाठ्यक्रम के अध्ययन से-

  • (क) विद्यार्थी अगले स्तरों पर अपनी रूचि और आवश्यकता के अनुरूप हिंदी की पढ़ाई कर सकेंगे तथा हिंदी में बोलने और लिखने में सक्षम हो सकेंगे ।
  • (ख) अपनी भाषा दक्षता के चलते उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विज्ञान, समाज विज्ञान और अन्य के साथ सहज संबंधता (अंतर्संबंध) स्थापित कर सकेंगे ।
  • (ग) दैनिक जीवन व्यवहार के विविध क्षेत्रों में हिंदी के औपचारिक/अनौपचारिक उपयोग की दक्षता हासिल कर सकेंगे ।
  • (घ) भाषा प्रयोग के परंपरागत तौर-तरीकों एवं विधाओं की जानकारी एवं उनके समसामयिक संदर्भो की समझ विकसित कर सकेंगे ।
  • (ङ) हिंदी भाषा में दक्षता का इस्तेमाल वे अन्य भाषा-संरचनाओं की समझ विकसित करने के लिए कर सकेंगे ।

कक्षा 10वीं में मातृभाषा के रूप में हिंदी शिक्षण के उद्देश्य-

  • कक्षा आठवीं तक अर्जित भाषिक कौशलों (सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना) का उत्तररोत्तर विकास।
  • सृजनात्मक साहित्य के आलोचनात्मक आस्वाद की क्षमता का विकास।
  • स्वतंत्र और मौखिक रूप से अपने विचारों की अभिव्यक्ति का विकास।
  • ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों के विमर्श की भाषा के रूप में हिंदी की विशिष्ट प्रकृति एवं क्षमता का बोध कराना।
  • साहित्य की प्रभावकारी क्षमता का उपयोग करते हुए सभी प्रकार की विविधताओं (राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग एवं भाषा) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील आचार-विचार का विकास।
  • भारतीय भाषाओं एवं विदेशी भाषाओं की सांस्कृतिक विविधता से परिचय।
  • व्यावहारिक और दैनिक जीवन में विविध अभिव्यक्तियों की मौखिक व लिखित क्षमता का विकास।
  • संचार माध्यमों (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में प्रयुक्त हिंदी की प्रकृति से अवगत कराना और नवीन भाषा प्रयोग करने की क्षमता से परिचय ।
  • विश्लेषण और तर्क क्षमता का विकास।
  • भावाभिव्यक्ति क्षमताओं का उत्तरोत्तर विकास।
  • मतभेद, विरोध और टकराव की परिस्थितियों में भी भाषा को संवेदनशील और तर्कपूर्ण इस्तेमाल से शांतिपूर्ण संवाद की क्षमता का विकास।
  • भाषा की समावेशी और बहुभाषिक प्रकृति की समझ का विकास करना।

शिक्षण युक्तियां
माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापक की भूमिका उचित वातावरण के निर्माण में सहायक होनी चाहिए। भाषा और साहित्य की पढ़ाई में इस बात पर ध्यान देने की जरूरत होगी कि-

  • विद्यार्थी द्वारा की जा रही गलतियों को भाषा के विकास के अनिवार्य चरण के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थी अबाध रूप से बिना झिझक के लिखित और मौखिक अभिव्यक्ति करने में उत्साह का अनुभव करें। विद्यार्थियों पर शुद्धि का ऐसा दबाव नहीं होना चाहिए कि वे तनावग्रस्त माहौल में पड़ जाएं। उन्हें भाषा के सहज, कारगर और रचनात्मक रूपों से इस तरह परिचित कराना उचित है कि वे स्वयं सहज रूप से भाषा का सृजन कर सकें।
  • विद्यार्थी स्वतंत्र और अबाध रूप से लिखित और मौखिक अभिव्यक्ति करें। अधिगम बाधित होने पर अध्यापक, अध्यापन शैली में परिवर्तन करें।
  • ऐसे शिक्षण-बिंदुओं की पहचान की जाए, जिनसे कक्षा में विद्यार्थी निरंतर सक्रिय भागीदारी करें और अध्यापक भी इस प्रक्रिया में उनके साथी बने।
  • हर भाषा का अपना व्याकरण होता है। भाषा की इस प्रकृति की पहचान कराने में परिवेशगत और पाठगत सन्दर्भों का ही उपयोग प्रयोग करना चाहिए। यह पूरी प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि विद्यार्थी स्वयं को शोधकर्ता समझें तथा अध्यापक इसमें केवल निर्देशन करें।
  • हिंदी में क्षेत्रीय प्रयोगों, अन्य भाषाओं के प्रयोगों के उदाहरण से यह बात स्पष्ट की जा सकती है कि भाषा अलगाव में नहीं बनती और उसका परिवेश अनिवार्य रूप से बहुभाषिक होता है।
  • भिन्न क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-सामग्री का इस्तेमाल किया जाए तथा किसी भी प्रकार से उन्हें अन्य विद्यार्थियों से कमतर या अलग न समझा जाए।
  • कक्षा में अध्यापक को हर प्रकार की विविधताओं ( लिंग, जाति, वर्ग, धर्म आदि) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्मित करना चाहिए।
  • काव्य भाषा के मर्म से विद्यार्थी का परिचय कराने के लिए जरूरी होगा कि किताबों में आए काव्यांशों की लयबद्ध प्रस्तुतियों के ऑडियो-वीडियो कैसेट तैयार किए जाएं। अगर आसानी से कोई गायक/गायिका मिले तो कक्षा में मध्यकालीन साहित्य के अध्यापन-शिक्षण में उससे मदद ली जानी चाहिए।
  • रा.शै.अ. और प्र.प. (एन.सी.ई.आर.टी.) द्वारा उपलब्ध कराए गए अधिगम प्रतिफल/सीखने-सिखाने की प्रक्रिया जो इस पाठ्यचर्या के साथ के संलग्नक के रूप में उपलब्ध है, को शिक्षक द्वारा क्षमता आधारित शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।
  • शिक्षा मंत्रालय के विभिन्न संगठनों तथा स्वतंत्र निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य कार्यक्रम/ई-सामग्री वृत्तचित्रों और फीचर फिल्मों को शिक्षण सामग्री के तौर पर इस्तेमाल करने की जरूरत है। इनके प्रदर्शन के क्रम में इन पर लगातार बातचीत के जरिए सिनेमा के माध्यम से भाषा के प्रयोग की विशिष्टता की पहचान कराई जा सकती है और हिंदी की अलग-अलग छटा दिखाई जा सकती है।
  • कक्षा में सिर्फ पाठ्यपुस्तक की स्थिति से बेहतर होगा कि शिक्षक के हाथ में तरह-तरह की पाठ्यसामग्री को विद्यार्थी देखें और कक्षा में अलग-अलग मौकों पर शिक्षक उनका इस्तेमाल करें।
  • भाषा लगातार ग्रहण करने की क्रिया में बनती है, इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका यह भी है कि शिक्षक खुद यह सिखा सकें कि वे भी शब्दकोश, साहित्यकोश, संदर्भग्रंथ की लगातार मदद ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में इनके इस्तेमाल करने को लेकर तत्परता बढ़ेगी। अनुमान के आधार पर निकटतम अर्थ तक पहुंच कर संतुष्ट होने की जगह वे सटीक अर्थ की खोज करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे शब्दों की अलग-अलग रंगत का पता चलेगा, वे शब्दों के सूक्ष्म अंतर के प्रति और सजग हो पाएंगे।

श्रवण व वचन (मौखिक बोलना) संबंधी योजनाएं

श्रवण (सुनना) कौशल

  • वर्णित या पठित सामग्री, वार्ता, भाषण, परिचर्चा, वार्तालाप, वाद-विवाद, कविता-पाठ आदि को सुनकर अर्थ ग्रहण करना, मूल्यांकन करना और अभिव्यक्ति के ढंग को जानना।
  • वक्तव्य के भाव, विनोद व उसमें निहित संदेश, व्यंग आदि को समझना।
  • वैचारिक मतभेद होने पर भी वक्ता की बात को ध्यानपूर्वक, धैर्यपूर्वक व शिष्टाचार के साथ सुनना व वक्ता के दृष्टिकोण को समझना।
  • ज्ञानार्जन मनोरंजन व प्रेरणा ग्रहण करने हेतु सुनना।
  • वक्तव्य का आलोचनात्मक विश्लेषण करना एवं सुनकर उसका सार ग्रहण करना।

श्रवण (सुनना) वचन (बोलना) का परीक्षण : कुल 5 अंक (2.5+2.5)

  • परीक्षक किसी भी प्रासंगिक विषय पर एक अनुच्छेद का स्पष्ट वाचन करेगा। अनुच्छेद तथ्यात्मक या सुझावात्मक हो सकता है। अनुच्छेद लगभग 100-150 शब्दों का होना चाहिए।

या

  • परीक्षक 1-2 मिनट का श्रव्य अंश (ऑडियो क्लिप) सुनवाएगा। अंश रोचक होना चाहिए। कथ्य/घटनापूर्ण एवं स्पष्ट होना चाहिए। वाचक का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट एवं विराम चिन्हों के उचित प्रयोग सहित होना चाहिए।
  • परीक्षार्थी ध्यानपूर्वक परीक्षा/ऑडियो क्लिप को सुनने के पश्चात परीक्षक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का अपनी समझ से मौखिक उत्तर देंगे।

कौशलों के मूल्यांकन का आधार

श्रवण (सुनना) वाचन (बोलना)
1. विद्यार्थी में परिचित संदर्भों में प्रयुक्त शब्दों और पदों को समझने की सामान्य योग्यता है।1. विद्यार्थी केवल अलग-अलग शब्दों और पदों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता है।
2. छोटे सुसम्बद्ध कथनों को परिचित संदर्भों में समझने की योग्यता है। 2. परिचित संदर्भों में शुद्धता से केवल छोटे सुसम्बद्ध कथनों का सीमित प्रयोग करता है।
3. परिचित या अपरिचित दोनों संदर्भ में कथित सूचना को स्पष्ट समझने की योग्यता है।3. अपेक्षित दीर्घ भाषण में जटिल कथनों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता है।
4. दीर्घ कथनों को पर्याप्त शुद्धता से समझता है और निष्कर्ष निकाल सकता है।4. अपरिचित स्थितियों में विचारों को तार्किक ढंग से संगठित कर धाराप्रवाह रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
5. जटिल कथनों के विचार-बिंदुओं को समझने की योग्यता प्रदर्शित करता है। 5. उद्देश्य और श्रोता के लिए उपयुक्त शैली को अपना सकता है।

टिप्पणी

  • परीक्षण से पूर्व परीक्षार्थी को तैयारी के लिए कुछ समय दिया जाए।
  • विवरणात्मक भाषा में विषय के अनुकूल तीनों कालों का प्रयोग अपेक्षित है।
  • निर्धारित विषय परीक्षार्थी के अनुभव संसार के हों, जैसे- कोई चुटकुला या हास्य-प्रसंग सुनाना, हाल में पढ़ी पुस्तक या देखे गए सिनेमा की कहानी सुनाना।
  • शिक्षार्थी को विषय केंद्रित स्वतंत्र अभिव्यक्ति करने का अवसर प्रदान करें।

पठन कौशल

  • सरसरी दृष्टि से पढ़कर पाठ का केंद्रीय विचार ग्रहण करना।
  • एकाग्रचित्त हो एक अभीष्ट गति के साथ मौन पठन करना।
  • पठित सामग्री पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना।
  • भाषा, विचार एवं शैली की सराहना करना।
  • साहित्य के प्रति अभिरुचि का विकास करना।
  • साहित्य की विभिन्न विधाओं की प्रकृति के अनुसार पठन कौशल का विकास।
  • संदर्भ के अनुसार शब्दों के अर्थ-भेदों की पहचान करना।
  • सक्रिय (व्यवहारोपयोगी) शब्द भंडार की वृद्धि करना।
  • पठित सामग्री के विभिन्न अंशों का परस्पर संबंध समझना।
  • पठित अनुच्छेदों के शीर्षक एवं उपशीर्षक देना।
  • कविता के प्रमुख उपादान यथा- तुक, लय, यति, गति, बलाघात आदि से परिचित कराना।

लेखन कौशल

  • लिपि के मान्य रूप का ही व्यवहार करना।
  • विराम चिन्हों का उपयुक्त प्रयोग करना।
  • प्रभावपूर्ण भाषा तथा लेखन-शैली का स्वाभाविक रूप से प्रयोग करना।
  • उपयुक्त अनुच्छेदों में बांटकर लिखना।
  • प्रार्थना पत्र, निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, संवेदना पत्र, ई-मेल, आदेश पत्र, एस.एम.एस. आदि लिखना और विविध प्रपत्रों को भरना।
  • विविध स्रोतों से आवश्यक सामग्री एकत्र कर अभीष्ट विषय पर निबंध लिखना।
  • देखी हुई घटनाओं का वर्णन करना और उन पर अपनी प्रतिक्रिया देना।
  • हिंदी की एक विधा से दूसरी विधा में रूपांतरण का कौशल।
  • समारोह और गोष्ठियों की सूचना और प्रतिवेदन तैयार करना।
  • सार संपर्क संक्षेपीकरण एवं भावार्थ लिखना।
  • गद्य एवं पद्य अवतरणों की व्याख्या लिखना।
  • स्वानुभूत विचारों और भावनाओं को स्पष्ट सहज और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करना।
  • क्रमबद्धता और प्रकरण की एकता बनाए रखना।
  • लिखने में सृजनात्मकता लाना।
  • अनावश्यक काट-छांट से बचते हुए सुपाठ्य लेखन कार्य करना।
  • दो भिन्न पाठों की पाठ्यवस्तु पर चिंतन करके उनके मध्य की संबद्धता (अंतर्संबंधों) पर अपने विचार अभिव्यक्त करने में सक्षम होना।
  • रटे-रटाए वाक्यों के स्थान पर अभिव्यक्तिपरक/स्थिति आधारित/उच्च चिंतन क्षमता वाले प्रश्नों पर सहजता से अपने मौलिक विचार प्रकट करना।

रचनात्मक अभिव्यक्ति

अनुच्छेद लेखन

  • पूर्णता- संबंधित विषय के सभी पक्षों को अनुच्छेद के सीमित आकार में संयोजित करना।
  • क्रमबद्धता- विचारों को क्रमबद्ध एवं तर्कसंगत विधि से प्रकट करना।
  • विषय-केंद्रित- प्रारंभ से अंत तक अनुच्छेद का एक सूत्र में बंधा होना।
  • सामासिकता- अनावश्यक विस्तार ना देकर सीमित शब्दों में यथासंभव विषय से सम्बद्ध पूरी बात कहने का प्रयास करना।

पत्र लेखन

  • अनौपचारिक पत्र विचार-विमर्श का जरिया, जिनमें मैत्रीपूर्ण भावना निहित, सरलता, संक्षिप्त और सादगी से भरी लेखन शैली।
  • औपचारिक पत्रों द्वारा दैनिक जीवन की विभिन्न स्थितियों में कार्य, व्यापार, संवाद, परामर्श, अनुरोध तथा सुझाव के लिए प्रभावी एवं स्पष्ट संप्रेषण क्षमता का विकास।
  • सरल और बोलचाल की भाषा शैली, उपयुक्त, सटीक शब्दों के प्रयोग, सीधे-सादे ढंग से विषय की स्पष्ट और प्रत्यक्ष प्रस्तुति।
  • प्रारूप की आवश्यक औपचारिकताओं के साथ सुस्पष्ट, सुलझे और क्रमबद्ध विचार आवश्यक तथ्य, संक्षिप्तता और संपूर्णता के साथ प्रभावी प्रस्तुति।

विज्ञापन लेखन
(विज्ञापित वस्तु/विषय को केंद्र में रखते हुए)

  • विज्ञापित वस्तु के विशिष्ट गुणों का उल्लेख।
  • आकर्षण लेखन शैली।
  • प्रस्तुति में नयापन, वर्तमान से जुड़ाव तथा दूसरों से भिन्नता।
  • विज्ञापन में आवश्यकतानुसार नारे (स्लोगन) का उपयोग।
  • विज्ञापन लेखन में बॉक्स, चित्र अथवा रंग का उपयोग अनिवार्य नहीं है किंतु समय होने पर प्रस्तुति को प्रभावी बनाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है।

संवाद लेखन
(दी गई परिस्थितियों के आधार पर संवाद लेखन)

  • सीमा के भीतर एक दूसरे से जुड़े सार्थक और उद्देश्यपूर्ण संवाद।
  • पात्रों के अनुकूल भाषा शैली।
  • कोष्ठक में वक्ता के हाव-भाव का संकेत।
  • संवाद लेखन के अंत तक विषय/मुद्दे पर वार्ता पूरी।

लघुकथा लेखन
(दिए गए विषय/शीर्षक आदि के आधार पर रचनात्मक सोच के साथ लघुकथा लेखन)

  • कथात्मकता
  • निरंतरता, जिज्ञासा/रोचकता
  • प्रभावी संवाद/ पात्रपात्रानुकूल संवाद
  • रचनात्मकता/कल्पनाशक्ति का उपयोग

संदेश लेखन
(शुभकामना, पर्व-त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर दिए जाने वाले संदेश)

  • विषय से संबंद्धता
  • संक्षिप्त और सारगर्भित
  • भाषाई दक्षता एवं प्रस्तुति
  • रचनात्मकता/सृजनात्मकता
  • विषय के अनुकूल काव्य-पंक्तियों का आंशिक उपयोग, किंतु इसकी अनिवार्यता नहीं

ई-मेल लेखन
(विविध विषयों पर आधारित औपचारिक ईमेल लेखन)

  • बोधगम्य भाषा
  • विषय से संबद्धता
  • संक्षिप्त, स्पष्ट व सारगर्भित
  • शिष्टाचार व औपचारिकताओं का निर्वाह

स्ववृत्त लेखन
(उपलब्ध रिक्ति के लिए स्ववृत्त लेखन)

  • स्पष्ट, संपूर्ण व व्यवस्थित
  • नाम, जन्मतिथि, वर्तमान पता, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, अभिरुचिओं, आत्मकथ्य, दूरभाष आदि का उल्लेख (परीक्षा में गोपनीयता का निर्वाह अपेक्षित)
  • अन्य विशेष जानकारी/योग्यता आदि

सूचना लेखन
(औपचारिक शैली में व्यावहारिक जीवन से संबंधित विषयों पर आधारित सूचना लेखन)

  • सरल एवं बोधगम्य भाषा
  • विषय की स्पष्टता
  • विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी
  • औपचारिक शिष्टाचार का निर्वाह

वार्षिक बोर्ड परीक्षा हेतु भार विभाजन

हिंदी पाठ्यक्रम – अ (कोड सं. 002)
कक्षा दसवीं हिंदी -अ
परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन 2022-2023

प्रश्न पत्र दो खंडों, खंड-‘अ’ और ‘ब’ में विभक्त होगा
खंड-‘अ’ में 49 वस्तुपरक प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें से केवल 40 प्रश्नों के ही उत्तर देने होंगे
खंड-‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे जाएंगे प्रश्नों में उचित आंतरिक विकल्प दिए जाएंगे
भारांक- 80 (वार्षिक बोर्ड परीक्षा) + 20 (आंतरिक परीक्षा)

निर्धारित समय- 3 घंटे

भारांक – 80

वार्षिक बोर्ड परीक्षा हेतु भार विभाजन
खंड-‘अ’ (बहुविकल्पी प्रश्न)

विषयवस्तु भार
1. अपठित गद्यांश व काव्यांश पर चिंतन क्षमता एवं अभिव्यक्ति कौशल पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्न
अ. एक अपठित गद्यांश लगभग 250 शब्दों का `(1\times 5=5)` (विकल्प के बिना) 5
ब. एक अपठित काव्यांश लगभग 120 शब्दों का `(1\times 5=5)` (विकल्प सहित) 5
2. व्याकरण के लिए निर्धारित विषयों पर विषय वस्तु का बोध, भाषिक बिंदु/संरचना आदि पर बहुविकल्पी प्रश्न `(1\times 16 = 16)`
(कुल 20 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे)
व्याकरण
अ. रचना के आधार पर वाक्य भेद (4 अंक) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे)4
ब. वाच्य (4 अंक) (5 से 4 प्रश्न करने होंगे) 4
स. पद परिचय (4 अंक) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे) 4
द. अलंकार (शब्दालंकार : स्लेश) (अर्थालंकार : उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, मानवीकरण) (4 अंक) (5 में से 4 प्रश्न करने होंगे) 4
3. पाठ्य पुस्तक क्षितिज भाग 2
अ. गद्य खंड 7
(i). क्षितिज से निर्धारित पाठों में से गद्यांश के आधार पर विषयवस्तु का ज्ञान, बोध, अभिव्यक्ति आदि पर एक अंकीय पांच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे `(1\times 5=5)`5
(ii). क्षितिज से निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर विद्यार्थियों की उच्च चिंतन क्षमताओं एवं अभिव्यक्ति का आकलन करने हेतु एक अंकीय दो बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे `(1\times 2=2)`2
ब. काव्य खंड 7
(i). क्षितिज से निर्धारित कविताओं में से काव्यांश के आधार पर एक अंकीय पांच बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे `(1\times 5=5)`5
(ii). क्षितिज से निर्धारित कविताओं के आधार पर विद्यार्थियों का काव्यबोध परखने हेतु एक अंकीय दो बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे `(1\times 2=2)`2
कुल40

खंड-‘ब’ (वर्णात्मक प्रश्न)

विषयवस्तु भार
पाठ्यपुस्तक क्षितिज भाग- 2 व पूरक पाठ्यपुस्तक कृतिका भाग- 2
अ. गद्य खंड
क्षितिज से निर्धारित पाठों में से विषयवस्तु का ज्ञान बोध, अभिव्यक्ति आदि पर तीन प्रश्न पूछे जाएंगे (विकल्प सहित- 25-30 शब्द सीमा वाले 4 में से 3 प्रश्न करने होंगे) `(2\times 3=6)`6
ब. काव्य खंड
क्षितिज से निर्धारित कविताओं के आधार पर विद्यार्थियों का काव्यबोध परखने हेतु 3 प्रश्न पूछे जाएंगे (विकल्प सहित- 25-30 शब्द सीमा वाले 4 में से 3 प्रश्न करने होंगे) `(2\times 3=6)`6
स. पूरक पाठ्यपुस्तक कृतिका भाग 2
कृतिका के निर्धारित पाठों पर आधारित 2 प्रश्न पूछे जाएंगे (विकल्प सहित- 50-60 शब्द सीमा वाले 3 में से 2 प्रश्न करने होंगे) `(4\times 2=8)`8
लेखन
(i). विभिन्न विषयों और संदर्भों पर विद्यार्थियों के तर्कसंगत विचार प्रकट करने की क्षमता को परखने के लिए संकेत-बिंदुओं पर आधारित समसामयिक एवं व्यवहारिक जीवन से जुड़े हुए 3 विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 120 शब्दों में अनुच्छेद लेखन6
(ii). अभिव्यक्ति की क्षमता पर केंद्रित औपचारिक अथवा अनौपचारिक विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में पत्र5
(iii). उपलब्ध रिक्ति के लिए लगभग 80 शब्दों में स्ववृत्त लेखन 5
अथवा
विविध विषयों पर आधारित लगभग 80 शब्दों में औपचारिक ई-मेल लेखन
(iv). विषय से संबंधित लगभग 60 शब्दों के अंतर्गत विज्ञापन लेखन 4
अथवा
संदेश लेखन लगभग 60 शब्दों में (शुभकामना, पर्व-त्योहारों एवं विशेष अवसरों पर दिए जाने वाले संदेश)
कुल40

आंतरिक मूल्यांकन

विषयवस्तु भार
अ. सामयिक आकलन5
ब. बहुविध आकलन5
स. पोर्टफोलियो5
द. श्रवण एवं वाचन5
कुल20

निर्धारित पुस्तकें

क्षितिज भाग 2 (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नवीनतम संस्करण

नवीनतम संस्करण (2022-2023) की पाठ्यपुस्तक PDF में download करने के लिए पाठ पर click करें

क्षितिज भाग 2
काव्य खंड

पाठ 1 : सूरदास – पद (PDF)
पाठ 2 : तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद (PDF)
पाठ 3 : देव – सवैया और कवित्त (PDF)
पाठ 4 : जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य (PDF)
पाठ 5 : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – उत्साह और अट नहीं रही (PDF)
पाठ 6 : नागार्जुन – यह दंतुरहित मुस्कान और फसल (PDF)
पाठ 7 : गिरिजाकुमार माथुर – छाया मत छूना (PDF)
पाठ 8 : ऋतुराज – कन्यादान (PDF)
पाठ 9 : मंगलेश डबराल – संगतकार (PDF)

गद्य खंड

पाठ 10 : स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा (PDF)
पाठ 11 : रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत (PDF)
पाठ 12 : यशपाल – लखनवी अंदाज़ (PDF)
पाठ 13 : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना – मानवीय करुणा की दिव्या चमक (PDF)
पाठ 14 : मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी (PDF)
पाठ 15 : महावीर प्रसाद द्विवेदी – स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन (PDF)
पाठ 16 : यतींद्र मिश्र – नौबतखाने में इबादत (PDF)
पाठ 17 : भदंत आनंद कौसल्यायन – संस्कृति (PDF)

कृतिका भाग 2 (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नवीनतम संस्करण

नवीनतम संस्करण (2022-2023) की पाठ्यपुस्तक PDF में download करने के लिए पाठ पर click करें

कृतिका भाग 2

पाठ 1 : माता का अंचल (PDF)
पाठ 2 : जॉर्ज पंचम की नाक (PDF)
पाठ 3 : साना साना हाथ जोड़ि (PDF)
पाठ 4 : एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! (PDF)
पाठ 5 : मैं क्यों लिखता हूँ? (PDF)
लेखक परिचय (PDF)

निम्नलिखित पाठों से प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे 2022-2023

DELETED PORTION for Session 2022-2023

क्षितिज भाग 2
काव्य खंड

  • देव- सवैया, कवित्त (पूरा पाठ)
  • गिरिजाकुमार माथुर- छाया मत छूना (पूरा पाठ)
  • ऋतुराज- कन्यादान (पूरा पाठ)

गद्य खंड

  • महावीर प्रसाद द्विवेदी- स्त्री-शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन (पूरा पाठ)
  • सर्वेश्वर दयाल सक्सेना- मानवीय करुणा की दिव्य चमक (पूरा पाठ)

कृतिका भाग 2

  • एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा ! (पूरा पाठ)
  • जॉर्ज पंचम की नाक (पूरा पाठ)

NCERT Solution

क्षितिज भाग 2
काव्य खंड

पाठ 1 : सूरदास – पद 
पाठ 2 : तुलसीदास – राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद 
पाठ 3 : देव – सवैया और कवित्त 
पाठ 4 : जयशंकर प्रसाद – आत्मकथ्य 
पाठ 5 : सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ – उत्साह और अट नहीं रही 
पाठ 6 : नागार्जुन – यह दंतुरहित मुस्कान और फसल 
पाठ 7 : गिरिजाकुमार माथुर – छाया मत छूना 
पाठ 8 : ऋतुराज – कन्यादान 
पाठ 9 : मंगलेश डबराल – संगतकार 

गद्य खंड

पाठ 10 : स्वयं प्रकाश – नेताजी का चश्मा 
पाठ 11 : रामवृक्ष बेनीपुरी – बालगोबिन भगत 
पाठ 12 : यशपाल – लखनवी अंदाज़ 
पाठ 13 : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना – मानवीय करुणा की दिव्या चमक 
पाठ 14 : मन्नू भंडारी – एक कहानी यह भी 
पाठ 15 : महावीर प्रसाद द्विवेदी – स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन 
पाठ 16 : यतींद्र मिश्र – नौबतखाने में इबादत 
पाठ 17 : भदंत आनंद कौसल्यायन – संस्कृति 

कृतिका भाग 2

पाठ 1 : माता का अंचल
पाठ 2 : जॉर्ज पंचम की नाक 
पाठ 3 : साना साना हाथ जोड़ि 
पाठ 4 : एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! 
पाठ 5 : मैं क्यों लिखता हूँ? 
लेखक परिचय 

Hindi Course B

Syllabus

राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, नई शिक्षा नीति 2020 तथा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा समय-समय पर दक्षता आधारित शिक्षा, कला समेकित अधिगम, अनुभवात्मक अधिगम को अपनाने की प्रेरणा दी गई है, जो शिक्षार्थियों की प्रतिभा को उजागर करने खेल-खेल में सीखने पर बल देने, आनंदपूर्ण ज्ञानार्जन और विद्यार्जन के विभिन्न तरीकों को अपनाने तथा अनुभव के द्वारा सीखने पर बल देती है । योग्यता या दक्षता आधारित शिक्षा से तात्पर्य है – सीखने और मूल्यांकन करने का एक ऐसा दृष्टिकोण, जो शिक्षार्थी के सीखने के प्रतिफल और विषय में विशेष दक्षता को प्राप्त करने पर बल देता है । योग्यता वह क्षमता, कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण है, जो व्यक्ति के वास्तविक जीवन में कार्य करने में सहायता करता है । इससे शिक्षार्थी यह सीख सकते हैं कि ज्ञान और कौशल को किस प्रकार प्राप्त किया जाए तथा उन्हें वास्तविक जीवन की समस्याओं पर कैसे लागू किया जाए । प्रत्येक विषय, प्रत्येक पाठ को जीवनोपयोगी बनाकर प्रयोग में लाना ही दक्षता आधारित शिक्षा है । इसके लिए उच्च स्तरीय चिंतन कौशल पर विशेष बल देने की आवश्यकता है ।

कला समेकित अधिगम को शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में सुनिश्चित करना अत्यधिक आवश्यक है । कला के संसार में कल्पना की एक अलग ही उड़ान होती है कला एक व्यक्ति की रचनात्मक अभिव्यक्ति है । कला समेकित अधिगम से तात्पर्य है – कला के विविध रूपों संगीत, नृत्य, नाटक, कविता, रंगशाला, यात्रा, मूर्तिकला, आभूषण बनाना, गीत लिखना, नुक्कड़ नाटक, कोलाज, पोस्टर, कला प्रदर्शनी को शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना । किसी विषय को आरंभ करने के लिए आइस ब्रेकिंग गतिविधि के रूप में तथा समंजस्यपूर्ण समझ पैदा करने के लिए अंतरविषयक या बहुविषयक परियोजनाओं के रूप में कला समेकित अधिगम का प्रयोग किया जाना चाहिए । इससे पाठ अधिक रोचक एवं ग्राहय हो जाएगा ।

अनुभवात्मक अधिगम या अनुभविक ज्ञानार्जन का उद्देश्य शैक्षिक वातावरण को शिक्षार्थी केंद्रित बनाने के साथ-साथ स्वयं मूल्यांकन करने, आलोचनात्मक रूप से सोचने, निर्णय लेने तथा ज्ञान का निर्माण कर उसमें पारंगत होने से है । यहाँ शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक की रहती है । ज्ञानार्जन-अनुभव सहयोगात्मक अथवा स्वतंत्र होता है और यह छात्रों को एक साथ कार्य करने तथा स्वयं के अनुभव द्वारा सीखने पर बल देता है । यह सिद्धांत और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करता है।

भारत एक बहुभाषी देश है जिसमें बहुत सी क्षेत्रीय भाषाएं रची बसी हैं। भाषिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भिन्न होने के बावजूद भारतीय परंपरा में बहुत कुछ ऐसा है जो एक दूसरे को जोड़ता है। यही कारण है कि मातृभाषा के रूप में अलग भाषा को पढ़ने वाला विद्यार्थी जब दूसरी भाषा के रूप में हिंदी का चुनाव करता है तो उसके पास अभिव्यक्ति का एक दृढ़ आधार पहली भाषा के रूप में पहले से ही मौजूद होता है। इसलिए छठी से आठवीं कक्षा में सीखी हुई हिंदी का विकास भी वह बहुत तेजी से करने लगता है। आठवीं कक्षा तक वह हिंदी भाषा में सुनने, पढ़ने, लिखने और कुछ-कुछ बोलने का अभ्यास कर चुका होता है। हिंदी की बाल पत्रिकाएं और छिटपुट रचनाएं पढ़ना भी अब उसे आ गया है। इसलिए जब वह नवमीं एवं दसवीं कक्षा में हिंदी पड़ेगा तो जहां एक और हिंदी भाषा के माध्यम से सारे देश से जुड़ेगा वहीं दूसरी ओर अपने क्षेत्र और परिवेश को हिंदी भाषा के माध्यम से जानने की कोशिश भी करेगा, क्योंकि किशोरवय के इन बच्चों के मानसिक धरातल का विकास स्तर तक पहुंच चुका होता है।

शिक्षण उद्देश्य

  • दैनिक जीवन में हिंदी में समझने बोलने के साथ-साथ लिखने की क्षमता का विकास करना।
  • हिंदी के किशोर-साहित्य, अखबार व पत्रिकाओं को पढ़कर समझ पाना और उसका आनंद उठाने की क्षमता का विकास करना।
  • औपचारिक विषयों और संदर्भ में बातचीत में भाग ले पाने की क्षमता का विकास करना।
  • हिंदी के जरिए अपने अनुभव संसार को लिखकर सहज अभिव्यक्ति कर पाने में सक्षम बनाना।
  • संचार के विभिन्न माध्यमों (प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक) में प्रयुक्त हिंदी के विभिन्न रूपों को समझने की योग्यता का विकास करना।
  • कक्षा में बहुभाषिक, बहुसांस्कृतिक संदर्भों के प्रति संवेदनशील सकारात्मक सोच बनाना।
  • अपनी मातृभाषा और परिवेशगत भाषा को साथ रखकर हिंदी की संरचनाओं की समझ बनाना।
  • सामाजिक मुद्दों पर समझ बनाना। (जाति, लिंग तथा आर्थिक विषमता)
  • कविता, कहानी तथा घटनाओं को रोचक ढंग से लिखना।
  • भाषा एवं साहित्य को समझने एवं आत्मसात करने की दक्षता का विकास।

शिक्षण युक्तियां
द्वितीय भाषा के रूप में पढ़ाई जा रही हिंदी भाषा का स्तर पढ़ने और पढ़ाने दोनों ही दृष्टियों से मातृभाषा सीखने की तुलना में कुछ मंथर गति से चलेगा। यह गति धीरे-धीरे बढ़ सके, इसके लिए हिंदी अध्यापकों को बड़े धीरज से अपने अध्यापन कार्यक्रमों को नियोजित करना होगा। किसी भी द्वितीय भाषा में निपुणता प्राप्त करने-कराने का एक ही उपाय है- उस भाषा का लगातार रोचक अभ्यास करना-कराना। ये अभ्यास जितने अधिक रोचक, सक्रिय एवं प्रासंगिक होंगे विद्यार्थियों की भाषिक उपलब्धि भी उतनी ही तेजी से हो सकेगी। मुखर भाषिक अभ्यास के लिए वार्तालाप, रोचक कहानी, सुनना-सुनाना, घटना-वर्णन, चित्र-वर्णन, संवाद, वाद-विवाद, अभिनय, भाषण प्रतियोगिताएं, कविता पाठ और अन्त्याक्षरी जैसी गतिविधियों का सहारा लिया जा सकता है।

  • काव्य भाषा के मर्म से विद्यार्थी का परिचय कराने के लिए जरूरी होगा कि किताबों में आए काव्यांशों की लयबद्ध प्रस्तुतियों के ऑडियो-वीडियो कैसेट तैयार किए जाएं। अगर आसानी से कोई गायक/गायिका मिले तो कक्षा में मध्यकालीन साहित्य के अध्यापन-शिक्षण में उससे मदद ली जानी चाहिए।
  • रा.शै.अ. और प्र.प. (एन.सी.ई.आर.टी.) द्वारा उपलब्ध कराए गए अधिगम प्रतिफल/सीखने-सिखाने की प्रक्रिया जो इस पाठ्यचर्या के साथ के संलग्नक के रूप में उपलब्ध है, को शिक्षक द्वारा क्षमता आधारित शिक्षा का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की आवश्यकता है।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय के विभिन्न संगठनों तथा स्वतंत्र निर्माताओं द्वारा उपलब्ध कराए गए अन्य कार्यक्रम/ई-सामग्री वृत्तचित्रों और फीचर फिल्मों को शिक्षण सामग्री के तौर पर इस्तेमाल करने की जरूरत है। इनके प्रदर्शन के क्रम में इन पर लगातार बातचीत के जरिए सिनेमा के माध्यम से भाषा के प्रयोग की विशिष्टता की पहचान कराई जा सकती है और हिंदी की अलग-अलग छटा दिखाई जा सकती है।
  • कक्षा में सिर्फ पाठ्यपुस्तक की स्थिति से बेहतर होगा कि शिक्षक के हाथ में तरह-तरह की पाठ्यसामग्री को विद्यार्थी देखें और कक्षा में अलग-अलग मौकों पर शिक्षक उनका इस्तेमाल करें।
  • भाषा लगातार ग्रहण करने की क्रिया में बनती है, इसे प्रदर्शित करने का एक तरीका यह भी है कि शिक्षक खुद यह सिखा सकें कि वे भी शब्दकोश, साहित्यकोश, संदर्भग्रंथ की लगातार मदद ले रहे हैं। इससे विद्यार्थियों में इनके इस्तेमाल करने को लेकर तत्परता बढ़ेगी। अनुमान के आधार पर निकटतम अर्थ तक पहुंच कर संतुष्ट होने की जगह वे सटीक अर्थ की खोज करने के लिए प्रेरित होंगे। इससे शब्दों की अलग-अलग रंगत का पता चलेगा, वे शब्दों के सूक्ष्म अंतर के प्रति और सजग हो पाएंगे।
  • भिन्न क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शिक्षण-सामग्री का इस्तेमाल किया जाए तथा किसी भी प्रकार से उन्हें अन्य विद्यार्थियों से कमतर या अलग न समझा जाए।
  • कक्षा में अध्यापन को हर प्रकार की विविधताओं (लिंग, धर्म, जाति, वर्ग, आदि) के प्रति सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण निर्मित करना चाहिए।

श्रवण (सुनने) और वचन (बोलने) की योग्यताएं

  • प्रवाह के साथ बोली जाती हुई हिंदी को अर्थबोध के साथ समझना।
  • हिंदी शब्दों का ठीक उच्चारण करना तथा हिंदी के स्वाभाविक अनुतान का प्रयोग करना।
  • सामान्य विषयों पर बातचीत करना और परिचर्चा में भाग लेना।
  • हिंदी कविताओं को उचित लय, आरोह-अवरोह और भाव के साथ पढ़ना।
  • सरल विषयों पर कुछ तैयारी के साथ 2-4 मिनट का भाषण देना।
  • हिंदी में स्वागत करना, परिचय और धन्यवाद देना।
  • हिंदी अभिनय में भाग लेना।

श्रवण तथा वाचन परीक्षा हेतु दिशा-निर्देश

  • श्रवण (सुनना) (2.5 अंक): वर्णित या पठित सामग्री को सुनकर अर्थ ग्रहण करना, वार्तालाप करना, वाद-विवाद, भाषण, कविता पाठ आदि को सुनकर समझना, मूल्यांकन करना और अभिव्यक्ति के ढंग को समझना।
  • वाचन (बोलना) (2.5 अंक): भाषण, सस्वर कविता पाठ, वार्तालाप और उसकी औपचारिकता, कार्यक्रम-प्रस्तुति कथा-कहानी अथवा घटना सुनाना, परिचय देना, भावानुकूल संवाद-वाचन।

श्रवण (सुनना) एवं वाचन (बोलना) कौशल का मूल्यांकन:
परीक्षक किसी प्रासंगिक विषय पर एक अनुच्छेद का स्पष्ट वाचन करेगा। अनुच्छेद तथ्यात्मक या सुझावात्मक हो सकता है। अनुच्छेद लगभग 120 शब्दों का होना चाहिए

या

परीक्षक 1-1.5 मिनट का श्रव्य अंश (ऑडियो क्लिप) सुनवाएगा। अंश रोचक होना चाहिए।कथ्य/घटना पूर्ण एवं स्पष्ट होनी चाहिए। वाचक का उच्चारण शुद्ध, स्पष्ट एवं विराम चिन्ह के उचित प्रयोग सहित होना चाहिए।

परीक्षार्थी ध्यानपूर्वक परीक्षक/ऑडियो क्लिप को सुनने के पश्चात परीक्षक द्वारा पूछे गए प्रश्नों का अपनी समझ से मौखिक उत्तर देंगे।

कौशलों अंतरण का मूल्यांकन
(इस बात का निश्चय करना कि क्या विद्यार्थी में श्रवण और वाचन की निम्नलिखित योग्यताएं हैं )

श्रवण (सुनना) वाचन (बोलना)
1. परिचित संदर्भों में प्रयुक्त शब्दों और पदों को समझने की सामान्य योग्यता है।1. केवल अलग-अलग शब्दों और पदों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता है।
2. छोटे सुसम्बद्ध कथनों को परिचित संदर्भों में समझने की योग्यता है। 2. परिचित संदर्भों में शुद्धता से केवल छोटे सुसम्बद्ध कथनों का सीमित प्रयोग करता है।
3. परिचित या अपरिचित दोनों संदर्भ में कथित सूचना को स्पष्ट समझने की योग्यता है।3. अपेक्षित दीर्घ भाषण में जटिल कथनों के प्रयोग की योग्यता प्रदर्शित करता है।
4. दीर्घ कथनों को पर्याप्त शुद्धता से समझता है और निष्कर्ष निकाल सकता है।4. अपरिचित स्थितियों में विचारों को तार्किक ढंग से संगठित कर धाराप्रवाह रूप में प्रस्तुत कर सकता है।
5. जटिल कथनों के विचार-बिंदुओं को समझने की योग्यता प्रदर्शित करने की क्षमता है। 5. उद्देश्य और श्रोता के लिए उपयुक्त शैली को अपना सकता है।

श्रवण वाचन कौशल एवं परियोजना कार्य का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर आंतरिक परीक्षक द्वारा ही किया जाएगा

पठन कौशल

पढ़ने की योग्यताएं

  • हिंदी में कहानी, निबंध, यात्रा वर्णन, जीवनी, पत्र, डायरी आदि को अर्थबोध के साथ पढ़ना।
  • पाठ्यपुस्तक के संबंध में विचार करना और अपना मत व्यक्त करना।
  • संदर्भ साहित्य को पढ़कर अपने काम के लायक सूचना एकत्र करना।
  • पठित सामग्री के विभिन्न अंशों का परस्पर संबंध समझना।
  • पठित वस्तु का सारांश तैयार करना।
  • भाषा, विचार एवं शैली की सराहना करना।
  • साहित्य के प्रति अभिरुचि का विकास करना।

लिखने की योग्यताएं

  • लिखते हुए व्याकरण-सम्मत भाषा का प्रयोग करना।
  • हिंदी के परिचित और अपरिचित शब्दों की सही वर्तनी लिखना।
  • विराम चिन्हों का समुचित प्रयोग करना।
  • लेखन के लिए सक्रिय (व्यवहारोपयोगी) शब्द भंडार की वृद्धि करना।
  • प्रभावपूर्ण भाषा तथा लेखन शैली का स्वाभाविक रूप से प्रयोग करना।
  • उपयुक्त अनुच्छेदों में बांटकर लिखना।
  • प्रार्थना पत्र, निमंत्रण पत्र, बधाई पत्र, संवेदना पत्र, आदेश पत्र, ईमेल, एस.एम.एस. आदि लिखना और विविध प्रपत्रों को भरना।
  • विभिन्न स्रोतों से आवश्यक सामग्री एकत्र कर एक अभीष्ट विषय पर अनुच्छेद लिखना।
  • देखी हुई घटनाओं का वर्णन करना और उन पर अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करना।
  • पढ़ी हुई कहानी को संवाद में तथा संवाद को कहानी में परिवर्तित करना।
  • समारोह और गोष्ठियों की सूचना और प्रतिवेदन तैयार करना।
  • लिखने में सृजनात्मकता लाना।
  • अनावश्यक काट-छांट से बचते हुए सुपाठ्य लेखन कार्य करना।
  • दो भिन्न पाठों की पाठ्यवस्तु पर चिंतन करके उनके मध्य की संबद्धता (अन्तर्संबंधों) पर अपने विचार अभिव्यक्त करने में सक्षम होना।
  • रटे-रटाए वाक्यों के स्थान पर अभिव्यक्तिपरक/स्थिति आधारित/उच्च चिंतन क्षमता वाले प्रश्नों पर सहजता से अपने मौलिक विचार प्रकट करना।

रचनात्मक अभिव्यक्ति

अनुच्छेद लेखन

  • पूर्णता- संबंधित विषय के सभी पक्षों को अनुच्छेद के सीमित आकार में संयोजित करना।
  • क्रमबद्धता- विचारों को क्रमबद्ध एवं तर्कसंगत विधि से प्रकट करना।
  • विषय-केंद्रित- प्रारंभ से अंत तक अनुच्छेद का एक सूत्र में बंधा होना।
  • सामासिकता- अनावश्यक विस्तार ना देकर सीमित शब्दों में यथासंभव विषय से सम्बद्ध पूरी बात कहने का प्रयास करना।

पत्र लेखन

  • अनौपचारिक पत्र विचार-विमर्श का जरिया, जिनमें मैत्रीपूर्ण भावना निहित, सरलता, संक्षिप्त और सादगी से भरी लेखन शैली।
  • औपचारिक पत्रों द्वारा दैनिक जीवन की विभिन्न स्थितियों में कार्य, व्यापार, संवाद, परामर्श, अनुरोध तथा सुझाव के लिए प्रभावी एवं स्पष्ट संप्रेषण क्षमता का विकास।
  • सरल और बोलचाल की भाषा शैली, उपयुक्त, सटीक शब्दों के प्रयोग, सीधे-सादे ढंग से विषय की स्पष्ट और प्रत्यक्ष प्रस्तुति।
  • प्रारूप की आवश्यक औपचारिकताओं के साथ सुस्पष्ट, सुलझे और क्रमबद्ध विचार आवश्यक तथ्य, संक्षिप्तता और संपूर्णता के साथ प्रभावी प्रस्तुति।

विज्ञापन लेखन
(विज्ञापित वस्तु/विषय को केंद्र में रखते हुए)

  • विज्ञापित वस्तु के विशिष्ट गुणों का उल्लेख।
  • आकर्षण लेखन शैली।
  • प्रस्तुति में नयापन, वर्तमान से जुड़ाव तथा दूसरों से भिन्नता।
  • विज्ञापन में आवश्यकतानुसार नारे (स्लोगन) का उपयोग।
  • विज्ञापन लेखन में बॉक्स, चित्र अथवा रंग का उपयोग अनिवार्य नहीं है किंतु समय होने पर प्रस्तुति को प्रभावी बनाने के लिए इनका उपयोग किया जा सकता है।

चित्र वर्णन
(चित्र में दिखाई दे रहे दृश्य/घटना को कल्पना शक्ति से अपने शब्दों में लिखना)

  • परिवेश की समझ
  • सूक्ष्म विवरणों पर ध्यान
  • दृश्यानुकुल भाषा
  • क्रमबद्धता और तारतम्यता
  • प्रभावशाली अभिव्यक्ति

संवाद लेखन
(दी गई परिस्थितियों के आधार पर संवाद लेखन)

  • सीमा के भीतर एक दूसरे से जुड़े सार्थक और उद्देश्यपूर्ण संवाद।
  • पात्रों के अनुकूल भाषा शैली।
  • कोष्ठक में वक्ता के हाव-भाव का संकेत।
  • संवाद लेखन के अंत तक विषय/मुद्दे पर वार्ता पूरी।

सूचना लेखन
(औपचारिक शैली में व्यावहारिक जीवन से संबंधित विषयों पर आधारित सूचना लेखन)

  • सरल एवं बोधगम्य भाषा
  • विषय की स्पष्टता
  • विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी
  • औपचारिक शिष्टाचार का निर्वाह

ई-मेल लेखन
(विविध विषयों पर आधारित औपचारिक ईमेल लेखन)

  • सरल शिष्ट व बोधगम्य भाषा
  • विषय से संबद्धता
  • संक्षिप्त कलेवर, किन्तु विषयगत सम्पूर्ण जानकारी
  • व्यावहारिक/कार्यालयी शिष्टाचार व औपचारिकताओं का निर्वाह

लघुकथा लेखन
(दिए गए विषय/शीर्षक आदि के आधार पर रचनात्मक सोच के साथ लघुकथा लेखन)

  • निरंतरता,
  • कथात्मकता
  • प्रभावी संवाद/ पात्रपात्रानुकूल संवाद
  • रचनात्मकता/कल्पनाशक्ति का उपयोग
  • जिज्ञासा/रोचकता

वार्षिक बोर्ड परीक्षा हेतु भार विभाजन

हिंदी पाठ्यक्रम – ब (कोड सं. 085 
कक्षा दसवीं हिंदी -ब 
परीक्षा हेतु पाठ्यक्रम विनिर्देशन 2022-2023

प्रश्न पत्र दो खंडों, खंड-‘अ’ और ‘ब’ में विभक्त होगा
खंड-‘अ’ में 45 वस्तुपरक प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें से केवल 40 प्रश्नों के ही उत्तर देने होंगे
खंड-‘ब’ में वर्णनात्मक प्रश्न पूछे जाएंगे प्रश्नों में उचित आंतरिक विकल्प दिए जाएंगे
भारांक- 80 (वार्षिक बोर्ड परीक्षा) + 20 (आंतरिक परीक्षा)

निर्धारित समय- 3 घंटे

भारांक – 80

वार्षिक बोर्ड परीक्षा हेतु भार विभाजन
खंड-‘अ’ (बहुविकल्पी प्रश्न)

विषयवस्तु भार
1. अपठित गद्यांश
अ. दो अपठित गद्यांश (लगभग 200 शब्दों के) बिना किसी विकल्प के `(1\times 5=5)+(1\times 5=5)` (दोनों गद्यांशों में एक अंकीय पांच-पांच प्रश्न पूछे जाएंगे ) 10
2. व्व्यायावहारिक व्याकरण के आधार पर बहुविकल्पात्मक प्रश्न (1 अंक `\times`16 अंक)
(कुल 21 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें से केवल 16 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे)
(i). पदबंध (5 में से 4 प्रश्न)4
(ii). रचना के आधार पर वाक्य रूपांतरण (5 में से 4 प्रश्न) 4
(iii). समास (5 में से 4 प्रश्न) 4
(iv). मुहावरे (6 में से 4 प्रश्न) 4
3. पाठ्य पुस्तक स्पर्श भाग 2
अ. काव्य खंड 7
पठित पद्यांश पर एक अंकीय पांच बहुविकल्पी प्रश्न `(1\times 5=5)`
स्पर्श (भाग-2) से निर्धारित कविताओं के आधार पर एक अंकीय दो बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे `(1\times 2)`
5
2
ब. गद्य खंड 7
पठित गद्यांश पर एक अंकीय पांच बहुविकल्पी प्रश्न `(1\times 5=5)`
स्पर्श (भाग-2) से निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर विद्यार्थियों की उच्च चिंतन क्षमताओं एवं अभिव्यक्ति का आकलन करने हेतु एक अंकीय दो बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे `(1\times 2=2)`
5
2
कुल40

खंड-‘ब’ (वर्णात्मक प्रश्न)

विषयवस्तु भार
पाठ्यपुस्तक स्पर्श भाग- 2
स्पर्श (गद्य खंड) से निर्धारित पाठों के आधार पर तीन में से दो प्रश्न पूछे जाएंगे (लगभग 60 शब्द) `(3 \times 2 =6)`6
स्पर्श (काव्य खंड) से निर्धारित पाठों के आधार पर तीन में से दो प्रश्न पूछे जाएंगे (लगभग 60 शब्द) `(3 \times 2 =6)`6
पूरक पाठ्यपुस्तक संचयन भाग 2
पूरक पाठ्यपुस्तक संचयन के निर्धारित पाठों से तीन में से दो प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनका उत्तर लगभग 60 शब्दों में देना होगा `(3 \times 2=6)`6
लेखन
(i). संकेत-बिंदुओं पर आधारित समसामयिक एवं व्यवहारिक जीवन से जुड़े हुए किन्ही 3 विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लेखन (विकल्प सहित)5
(ii). अभिव्यक्ति की क्षमता पर केंद्रित व्यवहारिक विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में अनौपचारिक पत्र5
(iii). व्यावहारिक जीवन से सम्बंधित विषयों पर आधारित लगभग 80 शब्दों में सुचना लेखन `(4 \times 1 =4)`4
(iv). विषय से सम्बंधित लगभग 60 शब्दों के अंतर्गत विज्ञापन लेखन (3 \times 1 =3)` (विकल्प सहित)3
(v). दिए गए विषय/शीर्षक आदि के आधार पर रचनात्मक सोच के साथ लगभग 100 शब्दों में लघुकथा लेखन
अथवा
विविध विषयों पर आधारित लगभग 100 शब्दों में औपचारिक ई-मेल लेखन
5
कुल40

आंतरिक मूल्यांकन

विषयवस्तु भार
अ. सामयिक आकलन5
ब. बहुविध आकलन5
स. पोर्टफोलियो5
द. श्रवण एवं वाचन5
कुल20

निर्धारित पुस्तकें

स्पर्श भाग 2 (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नवीनतम संस्करण

नवीनतम संस्करण (2022-2023) की पाठ्यपुस्तक PDF में download करने के लिए पाठ पर click करें

स्पर्श भाग 2
काव्य – खंड

पाठ 1 : कबीर- साखी (PDF)
पाठ 2 : मीरा- पद (PDF)
पाठ 3 : बिहारी- दोहे (PDF)
पाठ 4 : मैथिलीशरण गुप्त- मनुष्यता (PDF)
पाठ 5 : सुमित्रानंदन पंत- पर्वत प्रदेश में पावस (PDF)
पाठ 6 : महादेवी वर्मा- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल (PDF)
पाठ 7 : वीरेन डंगवाल- तोप (PDF)
पाठ 8 : कैफ़ी आज़मी- कर चले हम फ़िदा (PDF)
पाठ 9 : रवीन्द्रनाथ ठाकुर- आत्मत्राण (PDF)

गद्य – खंड

पाठ 10 : प्रेमचंद- बड़े भाई साहब (PDF)
पाठ 11 : सीताराम सेकसरिया- डायरी का एक पन्ना (PDF)
पाठ 12 : लीलाधर मंडलोई- तताँरा-वामीरो कथा (PDF)
पाठ 13 : प्रहलाद अग्रवाल- तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र (PDF)
पाठ 14 : अंतोन चेखव- गिरगिट (PDF)
पाठ 15 : निदा फ़ाज़ली- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले (PDF)
पाठ 16 : रवीन्द्र केलेकर- पतझर में टूटी पत्तियाँ (PDF)
पाठ 17 : हबीब तनवीर- कारतूस (PDF)

संचयन भाग 2 (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित नवीनतम संस्करण

नवीनतम संस्करण (2022-2023) की पाठ्यपुस्तक PDF में download करने के लिए पाठ पर click करें

संचयन भाग 2 

पाठ 1 : मिथिलेश्वर- हरिहर काका (PDF)
पाठ 2 : गुरदयाल सिंह- सपनों के-से दिन (PDF)
पाठ 3 : राही मासूम रज़ा- टोपी शुक्ला (PDF)
लेखक परिचय (PDF)

निम्नलिखित पाठों से प्रश्न नहीं पूछे जाएंगे 2022-2023

DELETED PORTION for Session 2022-2023

स्पर्श भाग 2
काव्य खंड

  • पाठ 3 : बिहारी- दोहे
  • पाठ 6 : महादेवी वर्मा- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल

गद्य खंड

  • पाठ 14 : अंतोन चेखव- गिरगिट

संचयन भाग 2 

  • पुस्तक में कोई परिवर्तन नहीं कोई पाठ नहीं हटाया गया है 

NCERT Solution

स्पर्श भाग 2 
काव्य – खंड

पाठ 1 : कबीर- साखी
पाठ 2 : मीरा- पद
पाठ 3 : बिहारी- दोहे
पाठ 4 : मैथिलीशरण गुप्त- मनुष्यता
पाठ 5 : सुमित्रानंदन पंत- पर्वत प्रदेश में पावस
पाठ 6 : महादेवी वर्मा- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
पाठ 7 : वीरेन डंगवाल- तोप
पाठ 8 : कैफ़ी आज़मी- कर चले हम फ़िदा
पाठ 9 : रवीन्द्रनाथ ठाकुर- आत्मत्राण

गद्य – खंड

पाठ 10 : प्रेमचंद- बड़े भाई साहब
पाठ 11 : सीताराम सेकसरिया- डायरी का एक पन्ना
पाठ 12 : लीलाधर मंडलोई- तताँरा-वामीरो कथा
पाठ 13 : प्रहलाद अग्रवाल- तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
पाठ 14 : अंतोन चेखव- गिरगिट
पाठ 15 : निदा फ़ाज़ली- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले
पाठ 16 : रवीन्द्र केलेकर- पतझर में टूटी पत्तियाँ
पाठ 17 : हबीब तनवीर- कारतूस

संचयन भाग 2

पाठ 1 : मिथिलेश्वर- हरिहर काका
पाठ 2 : गुरदयाल सिंह- सपनों के-से दिन
पाठ 3 : राही मासूम रज़ा- टोपी शुक्ला
लेखक परिचय

error: Content is protected !!